रविवार, 25 नवंबर 2018

एक दरोगा ऐसा भी

एक दरोगा ऐसा भी

रायबरेली में इन दिनों एक दरोगा खूब सुर्खियों में है। दरोगा शैलेश यादव सिर्फ इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि वह लगातार बेसहारा ,लाचार, दिव्यांगों की आर्थिक मदद अपनी तनख्वाह से करता है। यही नही बकायदा लाचार दिव्यांगों को  रोजगार भी अपने पैसे से उपलब्ध करवाता है ताकि लाचार दिव्यांग किसी के आगे हाथ न फैला सके। इस दरोगा की नेकी दिली को रायबरेली की जनता खूब सराह रही है।
पहले इस दिव्यांग को गौर से देखिए । यह दिव्यांग भदोखर थाना क्षेत्र के कुचारिया के पास का रहने वाला है और यह आधे शरीर से दिव्यांग है। इस दिव्यांग की हालत को रायबरेली के पुलिस आफिस में तैनात दरोगा शैलेश यादव ने देखा तो उसने इसे रोजगार देने को सोचा और बकायदा अपनी तनख्वाह से इसके लिए एक परचून की दुकान खुलवाई। दरोगा शैलेश यादव इसके पहले रायबरेली के ही गदागंज थाना क्षेत्र में भी एक दिव्यांग की मदद करते हुए उसे रोजगार दिलवा चुका है। दरोगा की नेकी दिली को अब लोग खूब सराह रहे है।
सवाल यह उठता है कि अगर पुलिस विभाग में इस तरह के दरोगाओं की संख्या ज्यादा हो जाये तो शायद लोगो के मन से खाकी का भय स्वतः ही खत्म हो जाये। जिस तरह लगातार शैलेश यादव गरीबो दिव्यांगों की मदद कर रहा है उसकी नेकी दिली को हम भी सलाम करते है।

शुक्रवार, 2 नवंबर 2018

*कोई मुझे पागल कहता है। कोई कृष्णा का दीवाना कहता है।।*

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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!
समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!
भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा!
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा!!
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का!
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!!