गुरुवार, 25 अक्टूबर 2018

*बहुत सुंदर कविता*

*जरा इत्मीनान से पढ़ें...*

तुम लिखना चाँद की खामोशीयाँ..!
मैं पत्तों की सरसराहट लिखूंगा..!!

तुम लिखना रात की मदहोशीयाँ..!
मैं साँसों की गरमाहट लिखूंगा..!!

तुम लिखना सूबह का इंतजार..!
मैं परिंदों की चहचहाहट लिखूंगा..!!

तुम लिखना अपनी हर चाहत..!
मैं तुमको अपनी चाहत लिखूंगा..!!

कहानी लिखूंगा, किरदार लिखूंगा..!!
अगर तुम मिल जाओ, खुशिया बे हिसाब लिखूंगा..!!

कुछ किस्से लिखूंगा, कुछ हिसाब लिखूंगा..!
अभी मसरूफ हूँ थोडा, पर एक दिन तुमपे किताब लिखूंगा..!!

कुछ सवाल लिखूंगा, कुछ जवाब लिखूंगा..!
तुम्हारी आँखों की गहराई से, सुबह शाम लिखूंगा..!!

हर एक एक लम्हे को, एक एक साल लिखूंगा..!
तुमको मशहूर, खुदको को बदनाम लिखूंगा..!!

मै तो नसीब का मारा हूँ, तो क्या हुआ..!
तुमको देवता, खुद को इंसान लिखूंगा..!!

लिखे होंगे किस्से, तुमने भी बोहोत..!
पर जो मै लिखूंगा, लाजवाब लिखूंगा..!!

लिखूंगा तुम्हे बचपन वाला इतवार कभी..!
तो कभी गर्मियों की छुट्टी का इंतज़ार लिखूंगा..!!

कल का भरोसा कम रखता हूँ मै..!
तो आज सहर होने तक तेरा नाम लिखूंगा..!!

तुम चाँद से रोशन हो जानता हूँ मै..!
फिर भी तुम्हे ईद से पहले वाली शाम लिखूंगा..!!

नफरत के लिए दुनिया बोहोत है..!
मै सारे किस्से मोहोब्बत के तेरे नाम लिखूंगा..!!

मै रूह का प्यासा हूँ मुझे सुकून की तलाश है..!
मै फिर भी अपने किस्से तेरे नाम लिखूंगा..!!

मै मजहबो में विश्वास नहीं रखता..!
पर कभी रहीम तो कभी तुम्हे राम लिखूंगा..!!

कह दिया जो भी कहना था,गर फिर भी कुछ बाकी हो..!
तो खुद को इंतजार तुमको, अंजाम लिखूंगा..!!

"पिता"

•पिता की सख्ती को बर्दाशत करो, ताकी काबिल बन सको,
•पिता की बातें गौर से सुनो, ताकी दुसरो की न सुननी पड़े,
•पिता के सामने ऊंचा मत बोलो वरना भगवान तुमको नीचा कर देगा,
•पिता का सम्मान करो, ताकी तुम्हारी संतान तुम्हारा सम्मान करे,
•पिता की इज्जत करो, ताकी इससे फायदा उठा सको,
•पिता का हुक्म मानो, ताकी खुश हाल रह सको,
•पिता के सामने नजरे झुका कर रखो, ताकी भगवान तुमको दुनियां मे आगे करे,
•पिता एक किताब है जिसपर अनुभव लिखा जाता है,
•पिता के आंसु तुम्हारे सामने न गिरे, वरना भगवान तुम्हे दुनिया  से गिरा देगा,
पिता एक ऐसी हस्ती है ...!!!!
माँ का मुकाम तो बेशक़ अपनी जगह है ! पर पिता का भी कुछ कम नही, माँ के कदमों मे स्वर्ग है पर पिता स्वर्ग का दरवाजा है, अगर दरवाज़ा ना ख़ुला तो अंदर कैसे जाओगे ?
जो गरमी हो या सर्दी अपने बच्चों की रोज़ी रोटी की फ़िक्र में परेशान रहता है, ना कोई पिता के जैसा प्यार दे सकता है ना कर सकता है, अपने बच्चों से !!
याद रख़े सूरज गरम ज़रूर होता है मगर डूब जाए तो अंधेरा छा जाता है, !!
आओ आज़ सब मिलकर उस अज़ीम हस्ती के लिए कामना करते है..|
हे भगवान मेरे पिता को अच्छी सेहत ओर तंदूरस्ती देना। उनकी तमाम परेशानी को दूर कर, और उन्हें हमेंशा हमारे लिए खुश रख़ना।

इस संदेश को सभी स्कूली बच्चों तक पहुंचाया जाए 
                         आपका धन्यवाद