शनिवार, 12 जनवरी 2019

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं

😢😢हर बेटे को समर्पित जो घर से दूर है”😢😢

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
जो तकिये के बिना कहीं…भी सोने से कतराते थे…
आकर कोई देखे तो वो…कहीं भी अब सो जाते हैं…
खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा लेते हैं…
अपने रूम में किसी को…भी नहीं आने देने वाले…
अब एक बिस्तर पर सबके…साथ एडजस्ट हो जाते हैं…
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
घर को मिस करते हैं लेकिन…कहते हैं ‘बिल्कुल ठीक हूँ’…
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले…अब कहते हैं ‘कुछ नहीं चाहिए’…
पैसे कमाने की जरूरत में…वो घर से अजनबी बन जाते हैं
लड़के भी घर छोड़ जाते हैं।
बना बनाया खाने वाले अब वो खाना खुद बनाते है,
माँ-बहन-बीवी का बनाया अब वो कहाँ खा पाते है।
कभी थके-हारे भूखे भी सो जाते हैं।
लड़के भी घर छोड़ जाते है।
मोहल्ले की गलियां, जाने-पहचाने रास्ते,
जहाँ दौड़ा करते थे अपनों के वास्ते,,,
माँ बाप यार दोस्त सब पीछे छूट जाते हैं
तन्हाई में करके याद, लड़के भी आँसू बहाते है
लड़के भी घर छोड़ जाते हैं
नई नवेली दुल्हन, जान से प्यारे बहिन- भाई,
छोटे-छोटे बच्चे, चाचा-चाची, ताऊ-ताई ,
सब छुड़ा देती है साहब, ये रोटी और कमाई।
मत पूछो इनका दर्द वो कैसे छुपाते हैं,
बेटियाँ ही नही साहब, बेटे घर छोड़ जाते हैं।

बुधवार, 26 दिसंबर 2018

बहुत ही सुंदर पंकितया है

*यह कविता मै अपने उन प्रिय मित्रों को समर्पित करता हूं।* *आप सभी तक पहुंचा रहा हूँ।*
🙏🙏आपको अच्छा लगे तो #Please_Like और #Comments कर दीजिएगा।🙏🙏
👉🌐👉https://Brijeshyadavbry.blogspot.com
*कहाँ कहाँ खोजूँ मैं उसको*
           *किसके दरवाज़े पर जाऊँ*
*जो मेरे चावल खा जाए*
           *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

जीवन की इस कठिन डगर में
            दोस्त हज़ारों मिल जाते हैं
जो मतलब पूरा होने पर
            अपनी राह बदल जाते हैं
हरदम साथ निभाने वाला
            साथी ढूँढ कहाँ से लाऊँ

*जो मेरे चावल खा जाए*
           *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

हार सुनिश्चित मालूम थी पर
            साथ न छोड़ा दुर्योधन का
मौत सामने आई फिर भी
            पैर न पीछे हटा कर्ण का
मित्रों पर जो जान लुटाएँ
            कहाँ खोजने उनको जाऊँ

*जो मेरे चावल खा जाए*
         *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

दर्द बयाँ करने पर आए
          वे तो साथी कहलाते हैं
मन की बात समझ जाए जो
          वे ही मित्र कहे जाते हैं
जिनसे मन के तार जुड़ें वो
          किस कोने से ढूँढ के लाऊँ

*जो मेरे चावल खा जाए*
         *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

          ★आपका वही अपना★
          ★बृजेश यादव (BrY)★

रविवार, 25 नवंबर 2018

एक दरोगा ऐसा भी

एक दरोगा ऐसा भी

रायबरेली में इन दिनों एक दरोगा खूब सुर्खियों में है। दरोगा शैलेश यादव सिर्फ इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि वह लगातार बेसहारा ,लाचार, दिव्यांगों की आर्थिक मदद अपनी तनख्वाह से करता है। यही नही बकायदा लाचार दिव्यांगों को  रोजगार भी अपने पैसे से उपलब्ध करवाता है ताकि लाचार दिव्यांग किसी के आगे हाथ न फैला सके। इस दरोगा की नेकी दिली को रायबरेली की जनता खूब सराह रही है।
पहले इस दिव्यांग को गौर से देखिए । यह दिव्यांग भदोखर थाना क्षेत्र के कुचारिया के पास का रहने वाला है और यह आधे शरीर से दिव्यांग है। इस दिव्यांग की हालत को रायबरेली के पुलिस आफिस में तैनात दरोगा शैलेश यादव ने देखा तो उसने इसे रोजगार देने को सोचा और बकायदा अपनी तनख्वाह से इसके लिए एक परचून की दुकान खुलवाई। दरोगा शैलेश यादव इसके पहले रायबरेली के ही गदागंज थाना क्षेत्र में भी एक दिव्यांग की मदद करते हुए उसे रोजगार दिलवा चुका है। दरोगा की नेकी दिली को अब लोग खूब सराह रहे है।
सवाल यह उठता है कि अगर पुलिस विभाग में इस तरह के दरोगाओं की संख्या ज्यादा हो जाये तो शायद लोगो के मन से खाकी का भय स्वतः ही खत्म हो जाये। जिस तरह लगातार शैलेश यादव गरीबो दिव्यांगों की मदद कर रहा है उसकी नेकी दिली को हम भी सलाम करते है।

शुक्रवार, 2 नवंबर 2018

*कोई मुझे पागल कहता है। कोई कृष्णा का दीवाना कहता है।।*

»
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!
समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!
भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा!
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा!!
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का!
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!!

गुरुवार, 25 अक्टूबर 2018

*बहुत सुंदर कविता*

*जरा इत्मीनान से पढ़ें...*

तुम लिखना चाँद की खामोशीयाँ..!
मैं पत्तों की सरसराहट लिखूंगा..!!

तुम लिखना रात की मदहोशीयाँ..!
मैं साँसों की गरमाहट लिखूंगा..!!

तुम लिखना सूबह का इंतजार..!
मैं परिंदों की चहचहाहट लिखूंगा..!!

तुम लिखना अपनी हर चाहत..!
मैं तुमको अपनी चाहत लिखूंगा..!!

कहानी लिखूंगा, किरदार लिखूंगा..!!
अगर तुम मिल जाओ, खुशिया बे हिसाब लिखूंगा..!!

कुछ किस्से लिखूंगा, कुछ हिसाब लिखूंगा..!
अभी मसरूफ हूँ थोडा, पर एक दिन तुमपे किताब लिखूंगा..!!

कुछ सवाल लिखूंगा, कुछ जवाब लिखूंगा..!
तुम्हारी आँखों की गहराई से, सुबह शाम लिखूंगा..!!

हर एक एक लम्हे को, एक एक साल लिखूंगा..!
तुमको मशहूर, खुदको को बदनाम लिखूंगा..!!

मै तो नसीब का मारा हूँ, तो क्या हुआ..!
तुमको देवता, खुद को इंसान लिखूंगा..!!

लिखे होंगे किस्से, तुमने भी बोहोत..!
पर जो मै लिखूंगा, लाजवाब लिखूंगा..!!

लिखूंगा तुम्हे बचपन वाला इतवार कभी..!
तो कभी गर्मियों की छुट्टी का इंतज़ार लिखूंगा..!!

कल का भरोसा कम रखता हूँ मै..!
तो आज सहर होने तक तेरा नाम लिखूंगा..!!

तुम चाँद से रोशन हो जानता हूँ मै..!
फिर भी तुम्हे ईद से पहले वाली शाम लिखूंगा..!!

नफरत के लिए दुनिया बोहोत है..!
मै सारे किस्से मोहोब्बत के तेरे नाम लिखूंगा..!!

मै रूह का प्यासा हूँ मुझे सुकून की तलाश है..!
मै फिर भी अपने किस्से तेरे नाम लिखूंगा..!!

मै मजहबो में विश्वास नहीं रखता..!
पर कभी रहीम तो कभी तुम्हे राम लिखूंगा..!!

कह दिया जो भी कहना था,गर फिर भी कुछ बाकी हो..!
तो खुद को इंतजार तुमको, अंजाम लिखूंगा..!!

"पिता"

•पिता की सख्ती को बर्दाशत करो, ताकी काबिल बन सको,
•पिता की बातें गौर से सुनो, ताकी दुसरो की न सुननी पड़े,
•पिता के सामने ऊंचा मत बोलो वरना भगवान तुमको नीचा कर देगा,
•पिता का सम्मान करो, ताकी तुम्हारी संतान तुम्हारा सम्मान करे,
•पिता की इज्जत करो, ताकी इससे फायदा उठा सको,
•पिता का हुक्म मानो, ताकी खुश हाल रह सको,
•पिता के सामने नजरे झुका कर रखो, ताकी भगवान तुमको दुनियां मे आगे करे,
•पिता एक किताब है जिसपर अनुभव लिखा जाता है,
•पिता के आंसु तुम्हारे सामने न गिरे, वरना भगवान तुम्हे दुनिया  से गिरा देगा,
पिता एक ऐसी हस्ती है ...!!!!
माँ का मुकाम तो बेशक़ अपनी जगह है ! पर पिता का भी कुछ कम नही, माँ के कदमों मे स्वर्ग है पर पिता स्वर्ग का दरवाजा है, अगर दरवाज़ा ना ख़ुला तो अंदर कैसे जाओगे ?
जो गरमी हो या सर्दी अपने बच्चों की रोज़ी रोटी की फ़िक्र में परेशान रहता है, ना कोई पिता के जैसा प्यार दे सकता है ना कर सकता है, अपने बच्चों से !!
याद रख़े सूरज गरम ज़रूर होता है मगर डूब जाए तो अंधेरा छा जाता है, !!
आओ आज़ सब मिलकर उस अज़ीम हस्ती के लिए कामना करते है..|
हे भगवान मेरे पिता को अच्छी सेहत ओर तंदूरस्ती देना। उनकी तमाम परेशानी को दूर कर, और उन्हें हमेंशा हमारे लिए खुश रख़ना।

इस संदेश को सभी स्कूली बच्चों तक पहुंचाया जाए 
                         आपका धन्यवाद

बुधवार, 17 अक्टूबर 2018

सौ बात की एक बात

#सौ_बात_की_एक_बात#Brijeshyadavbry
लेकिन आज कंफर्म हो गया भाई की हमारे पार्टी में बहुत से लोग सिर्फ लड़ाना जानते हैं। आपस मे भाई चारगी नही करवाना चाहते हैं, अगर उनको बोल दो पार्टी का जरा प्रचार प्रसार कर दो तो उनकी हुक़्क़ी टाइट हो जाएगी।
उनको सिर्फ बड़ी बड़ी बातें फेखना किसी चट्टी चौराहे पर #अखिलेश_यादव जी को यह करना चाहिए उनको यह करना चाहिए। वह ख़ुद भूल जाते हैं, मेरी क्या Image है कितने लोग मुझे जानते हैं, जिले में विधानसभा में अपने गांव में जो आदमी अपने घर गाँव मे कोई तलूक नही रखता है। मुझे लगता है कि वही लोग ज्यादा पार्टी और भैया अखिलेश यादव जी वह नेता जी को पूरे दिन कोसते रहते हैं और दूसरों की चाय पीने के बाद सिर्फ चमचागीरी करते हैं।
मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं। कि जो समाजवादी है और समाजवादी विचारधारा का है वह आपस में लड़ ही नहीं सकता और आप लोग फालतू की बकवास छोड़कर पार्टी को मजबूत करने का काम करिए कुछ चमचों की वजह से विधानसभा चुनाव में हार मिली इसलिए केवल पार्टी को मजबूत बनाने का कार्य करें अगर जो भी इसमें टीका टिप्पणी करता है वह समाजवादी हुई नहीं सकता पार्टी को मजबूत करने का काम करिए सबके लिए अच्छा होगा।