जाति है कि जाती नही-
बाबूजी भगवा दुपट्टा लगा लेने से आप हिन्दू थोड़े न हो जाएंगे.......
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कभी कट्टर समाजवादी/लोहियावादी रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद श्री हुकुमदेव नारायण सिंह यादव जी को, जो अब भाजपा के झंडावरदार हैं, पटना एयर पोर्ट पर एक भूसुर सुरक्षाकर्मी मिश्रा जी ने 01 अप्रैल 2018 को चड्ढी छोड़कर सब कुछ निकलवाकर सुरक्षा जांच करने का कार्य किया है जिसकी शिकायत हुकुमदेव बाबूजी ने 02 अप्रैल 2018 को भारतीय गृह मंत्री जी से कर दिया है।इस पूरे मामले में हुवा क्या,या होगा क्या यह कोई मायने नही रखता है क्योंकि यह तो रोज ही लाखो लोगो के साथ कहीं न कहीं,किसी न किसी रूप में हो ही रहा है।बस हम इस पर चर्चा तभी करते हैं जब ऐसी घटनाएं किसी आम आदमी से ऊपर किसी खास आदमी के साथ हो जाती है।
हुकुमदेव बाबूजी एक अति लोकप्रिय सांसद व नेता हैं।क्या गजब का बोलते हैं?देश की संसद द्वारा सर्वश्रेष्ठ सांसद के अलंकरण से अलंकृत भी हो चुके हैं।सामाजिक न्याय पर आपका कांसेप्ट निश्चय ही ठीक-ठाक है लेकिन पॉलिटकल फोरम पर थोड़ा बेपटरी विचार है आपका जिसमे हो सकता है सामाजिक न्याय के स्थापित नेताओ की बेकद्री भी आपके उधर होने का कारण हो।खैर इस पर मुझे चर्चा नही करनी है।जो असल सवाल है हुकुमदेव बाबूजी वह बड़ा गम्भीर है जो जाति का है।
हुकुमदेव बाबूजी!भगवा गमछा लगा लेने से आप चितपावन बाभन थोड़े न हो जाएंगे।भगवा गमछा गले मे लपेट कर यदि आप यह समझते रहे हो कि आपने हिन्दू और हिंदुत्व का सर्टिफिकेट ले लिया है तो मेरी समझ से यही पर आप गच्चा खा गए।हुकुमदेव बाबूजी!हिन्दू और हिंदुत्व का सर्टिफिकेट यह भगवा गमछा नही है क्योंकि यह तो आप जैसा कोई भी अहीर,गंडेरी,चमार,पासी धारण कर ले सकता है,असल सर्टिफिकेट जनेऊ,अरे वही तीन तागा और नाम के आगे मिश्र,तिवारी,पांडेय,शुक्ल,भट्टाचार्य,चटर्जी,सावरकर,गोलवरकर,तेंदुलकर,उपाध्याय, रावत,श्रीनेत,गहरवार,चन्देल,विशेन-सिंह आदि का आभूषण है।
हुकुमदेव बाबूजी!आप भाजपा में जाकर भगवा दुपट्टा लगाकर भूसुर मिश्र जी से कहेंगे कि सांसद है,भाजपाई हैं तो इससे आप हिन्दू धर्म के अनुसार वीआईपी ट्रीटमेंट थोड़े न पा जाएंगे?देश के अम्बेडकर कृत संविधान की बदौलत आप सांसद बन राजा समझते हो या बन गए हैं तो समझते रहिये या बना करिए लेकिन मनु के संविधान के मुताबिक आप शूद्र हैं शूद्र, और शूद्र के साथ ब्राह्मण का सलूक क्या होना चाहिए,यह आप बखूबी जानते हैं क्योंकि बहुत बोलते हैं इस पर आप।
हुकुमदेव बाबूजी! आप सांसद हैं,सीनियर सिटीजन हैं,केंद्रीय मिनिस्टर रहे हैं,1977 से संसद में दहाड़ रहे हैं यह अलग बात है और आप सामाजिक तौर पर जाति से अहीर हैं यह अलग बात है।हुकुमदेव बाबूजी!यह जाती बड़ी बुरी चीज है।इस जाति ने आपको चड्ढी गैंग में शामिल रहने के नाते चड्ढी उतारने से रोक दिया वरना कोई गैर होता तो शायद चड्ढी भी उतर जाती।
भारत मे और वह भी पटना में बिहार के इतने वरिष्ठतम सांसद से जाति के नाते अभद्रता का इतना वीभत्स स्वरूप शायद ही कहीं दिखे क्योकि बुजुर्गी होने तथा सांसद होने की बात जानने के बाद भी चड्ढी छोड़ निर्वस्त्र कर सारे पैसेंजर्स के बीच अकेले हुकुमदेव बाबूजी के साथ मिश्रा जी का यह ब्यवहार यही बताता है कि राष्ट्रपति,सांसद,आईएएस या और कुछ भी भारतीय अम्बेडकर कृत संविधान की बदौलत बन जाओ शूद्र समाज के लोगो लेकिन मनु के संविधान के मुताबिक इंसान नही बन पाओगे,तुम्हारा दर्जा ढोल और पशु की तरह ही रहेगा जिन्हें जब मौका मिलेगा ताड़ना/मारना मिलेगा।
Brijesh Yadav BrY जी
रविवार, 26 अगस्त 2018
हुकुमदेव नारायण सिंह यादव
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