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सोमवार, 25 मई 2020

राजेश कुमार होंगे आज़मगढ़ के नए जिलाधिकारी

*Ymsnews24*
By:-बृजेश यादव आज़मगढ़
पहले थे आईपीएएस फिर बने आईएएस
राजस्थान के अलवर के मूल निवासी राजेश कुमार वर्ष 2008 बैच के आईएएस है। वह वर्ष 2005 में उड़ीसा बैच के आईपीएस थे बाद में फिर से मेहनत करके आईएएस बने। राजेश कुमार की प्रारंभिक शिक्षा नई दिल्ली से हुई है और दिल्ली कॉलजे ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रानिक एंड कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन किया है। मुरादाबाद में सीडीओ, बरेली में एसडीएम के साथ वर्ष 2012- 13 में संत कबीर नगर के जिलाधिकारी रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त कन्नौज व मथुरा में भी डीएम पद की जिम्मेदारी संभाली थी। पहले आईएएस राजेश कुमार लखनऊ में कौशल विकास मिशन के एमडी पद पर थे। बनारस विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद भी 2017 में संभाल चुके हैं,
वर्तमान में मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के पद पर है  अब वह जिलाधिकारी आज़मगढ़ का पद सम्भालेंगे , 31 मई को एनपी सिंह का कार्यकाल खत्म होने के बाद नए जिलाधिकारी के रुप में अपनी सेवाएं देंगे।

शनिवार, 23 मई 2020

एक जिलाधिकारी ऐसा भी जो जनता के दिल पर राज किया, - नागेंद्र प्रसाद सिंह

जनपद आज़मगढ़ के जिलाधिकारी श्री नागेंद्र प्रसाद सिंह जी (आई ए एस ) का पेपर मैसी पोर्ट्रेट -

      किसी जनपद का कोई ऐसा प्रसाशनिक अधिकारी जो अपने सकारात्मक, रचनात्मक सोच और अपने कार्यों से उस जनपद चित्र बदल दिया हो अमूमन कम ही सुनाई पड़ती है और  जबकि ऐसे जनपद की जिसकी छवि एक बड़े स्तर पर नकारात्मक हो। वाकई यह एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। ख़ास तौर पर जब कला और साहित्य जो केंद्र बिंदु हो।
  ऐसे ही एक जिलाधिकारी हमारे गृह जनपद आज़मगढ़ के हैं श्री नागेंद्र प्रसाद सिंह। जिनके कार्यों से जनपद के लोग और यहाँ के कलाकार तथा हम स्वयं प्रभावित हो कर यहाँ चर्चा कर रहे हैं। इसी चर्चा से प्रभावित होकर हमने इनके पोर्ट्रेट पेपर मैसी में  बनाने का निश्चय किया और जो पूर्ण हुआ।
साहित्य की दुनियां में आज़मगढ़ राहुल सांस्कृत्यायन, कैफ़ी आज़मी, अयोध्या सिंह हरिऔध के नाम से दुनियाभर में विख्यात है वहीं दर्जनों की संख्या में शहीदों के भी नाम हैं जिन्होंने अपने प्राण सीमा की रक्षा में लगा दी। जहाँ देश मे एक नकारात्मक पहचान के आगे जनपद में भी इनकी खोती पहचान को कायम करने के लिए स्वयं जिलाधिकारी महोदय ने जिले के लोगों को जागरूक करने का काम किया और इनके सम्मान में अनेकों कार्य भी किया।
    आज जब कोरोना जैसी महामारी से पूरा विश्व एक संकट से लड़ रहा है। ऐसे में हमारे जिलाधिकारी महोदय दिनोरात जनपद की रक्षा और सुरक्षा में लगे हुए हैं। जिला प्रशासन आज़मगढ़ के प्रति  संवेदनशील जिलाधिकारी एन. पी.सिंह के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ, कि आज़मगढ़ के दूरदराज में संकटग्रस्त कलाकारों/रंगकर्मियों को आर्थिक व अन्य सहयोग प्रदान किया गया।
    जब कला साहित्य के महत्व को समझने वाले अधिकारी होंगे तो निश्चय ही कला व कलाकार सम्मान पाएंगे और कला पनप पाएगी।
इन्होंने लोगों का कला,संस्कृति और साहित्य के प्रति सकारात्मक नजरिया की तरफ ध्यान दिलाने की पहल की। इसका सबसे बड़ा उदाहरण इस बार हुए आज़मगढ़ महोत्सव है। यह महोत्सव पहली बार जनपद के तहसील स्तर पर किया गया और इस महोत्सव में आज़मगढ़ के सभी कला,संगीत,रंगमंच , नृत्य,खेल,आज़मगढ़ की पॉटरी, हस्तकला,और आम जन के रचनात्मक ऊर्जा को अभिव्यक्त करने के लिए एक शानदार आयोजन किया गया। तथा सम्मान दिया गया। इसका मैं स्वयं आँखों देखा उदाहरण हूँ। मुझे भी इस महोत्सव में चित्रकला,फोटोग्राफी प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था।
   मेरा मानना है कि इस प्रकार की सोच तभी आकार लेती है जब इस प्रकार सोच रखने वाला व्यक्ति स्वयं पहल करता है। जिलाधिकारी महोदय स्वयं साहित्य से जुड़े हुए हैं। तभी आज हम ऐसे व्यक्तित्व की चर्चा कर रहे हैं। जिसके कारण आज जनपद में कला साहित्य से जुड़े लोग इनकी प्रसंशा कर रहे हैं।
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            लेख
भूपेंद्र कुमार अस्थाना