सोमवार, 1 जून 2020

रहेगा, 8 जून से धीरे धीरे होटल, रेस्तरां, सैलून खुलेंगे, धार्मिक स्थल, मॉल, स्कूल बंद रहेंगे, दुकान शाम 8 बजे तक खुल सकेंगे, रात 9 से सुबह 5 तक कर्फ्यू जैसा

लॉकडाउन 30 जून तक रहेगा, 8 जून से धीरे धीरे होटल, रेस्तरां, सैलून खुलेंगे, धार्मिक स्थल, मॉल, स्कूल बंद रहेंगे, दुकान शाम 8 बजे तक खुल सकेंगे, रात 9 से सुबह 5 तक कर्फ्यू जैसा

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आजमगढ़ : जिला मजिस्ट्रेट राजेश कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में कोरोना वायरस (कोविड-19) संक्रमण से बचाव तथा इस संदर्भ में उत्पन्न परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में लागू किया गया देशव्यापी लाकडाउन भारत सरकार, गृह मंत्रालय द्वारा दिनांक 01 जून 2020 से 30 जून 2020 तक प्रभावी रहने के निर्देश निर्गत किये गये हैं। जारी निर्देशों के आलोक में जनपद की वर्तमान परिस्थितियों का आकलन करते हुये जनपद में निर्धारित प्रविधानों के साथ लाकडाउन 30 जून 2020 तक जारी रहेगा। उन्होने बताया कि कई गतिविधियाॅ बंद रहेंगी, परन्तु दिनांक 08 जून 2020 से इन्हें खोलने के सम्बंध में राज्य सरकार द्वारा पृथक से दिशा निर्देश जारी किये जाने पर उनका अनुपालन किया जायेगा। जिसमें होटल, रेस्टोरेंट एवं अन्य सत्कार सेवायें (भ्वेचपजंसपजल ैमतअपबमे), सिवाय उनके जो स्वास्थ्य कर्मियों, पुलिस एवं सरकारी अधिकारियों हेतु उपयोग में लायी जा रही हों अथवा लाकडाउन के कारण फॅसें हुये पर्यटकों या क्वारंटाइन करने के उपयोग में लायी जा रही हो। बस डिपो, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों पर चलने वाली कैण्टीन इत्यादि तथा रेस्टोरेंट किचन को खाने/खाद्य पदार्थों की केवल होम डिलिवरी करने की अनुमति होगी। शापिंग माल बंद रहेंगे। समस्त धार्मिक स्थल/पूजा स्थल जन सामान्य हेतु बंद रहेंगे। उन्होने आगे कहा कि समस्त स्कूल, कालेज, शैक्षणिक/प्रशिक्षण/कोचिंग संस्थान इत्यादि बन्द रहेंगे, यद्यपि आनलाइन/दूरस्थ शिक्षा हेतु अनुमति रहेगी। माह जुलाई में इन्हें खोलने के सम्बंध में राज्य सरकार द्वारा पृथक से दिशा निर्देश जारी किये जाने पर उनका अनुपालन किया जायेगा। समस्त सिनेमा हाल, जिम, तरण ताल (स्वीमिंग पुल) मनोरंजन पार्क, थियेटर, बार एवं सभागार, एसेम्बली हाल तथा इस प्रकार के अन्य स्थान बंद रहेंगे, यद्यपि खेल परिसर एवं स्टेडियम को खोलने की अनुमति होगी, किन्तु इनमें दर्शकों हेतु अनुमति नहीं होगी। रात्रि निषेधाज्ञा- रात्रि 9.00 बजे से सुबह 5.00 बजे तक किसी भी व्यक्ति, वाहन आदि का आवागमन निषिद्ध रहेगा (केवल आवश्यक गतिविधियों को छोड़कर), इस सम्बंध में जारी दं0प्र0सं0 की धारा 144 के अंतर्गत जारी निषेधाज्ञा का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। संक्रमण के खतरे के प्रति संवेदनशील व्यक्तियों की सुरक्षा के दृष्टिगत समस्त जोन में 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति , सह रूग्णता से ग्रसित व्यक्ति , गर्भवती स्त्रियाँ और 10 वर्ष से कम आयु के बच्चे घरों के अन्दर ही रहेंगे, सिवाय ऐसी परिस्थिति के जिनमें स्वास्थ्य सम्बंधी आवश्यकताओं हेतु बाहर निकलना आवश्यक हो। उन्होने बताया कि केवल स्वास्थ्य विभाग, स्वच्छता के कार्य एवं आवश्यक वस्तुओं की डोरस्टेप डिलिवरी के कार्य की ही अनुमति होगी। कण्टेनमेंट जोन में कड़ा परिधीय नियंत्रण रखते हुये यह सुनिश्चित किया जायेगा कि केवल चिकित्सकीय आपातकालीन स्थिति और आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की पूर्ति छोड़कर किसी भी व्यक्ति का अंदर अथवा बाहर की ओर आवागमन की अनुमति नहीं होगी। इस सम्बंध में केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा राज्य सरकार के दिशा निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। सघन कान्टैक्ट ट्रेसिंग , हाउस टू हाउस सर्विलांस, और यथावश्यक चिकित्सकीय गतिविधियाँ होंगी। निम्नलिखित गतिविधियों को (कन्टेनमेंट जोन को छोड़कर) प्रतिबंधों के साथ अनुमति होगी- समस्त सरकारी कार्यालय 100 प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुलेंगे, परन्तु कार्यालयों में संक्रमण की रोकथाम के दृष्टिगत कार्यालयों में भीड़-भाड़ न हो इस हेतु कार्यालय स्टाफ को तीन शिफ्ट में बुलाया जायेगा प्रातः 9.00 बजे से सायं 5.00 बजे तक , प्रातः 10.00 बजे से सायं 6.00 बजे तक, प्रातः 11.00 बजे से सायं 7.00 बजे तक। कार्यालय में सैनिटाइजेशन, फेसमास्क/फेसकवर व सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन किया जायेगा। सभी प्रकार की औद्योगिक गतिविधियों की अनुमति होगी। औद्योगिक इकाइयों के संचालन के दौरान सामाजिक/शारीरिक दूरी बनाये रखने, सैनिटाइजेशन, फेसमास्क/फेसकवर का प्रयोग करना होगा। रात्रि की शिफ्ट हेतु सुरक्षित परिवहन के साधन की व्यवस्था इकाई द्वारा की जायेगी जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करना होगा। आवश्यक व गैर आवश्यक वस्तुओं की बिक्री से सम्बंधित दुकानों के खुलने की अनुमति निम्नवत् होगी। जिसमें सप्ताह के सभी दिन प्रातः 8ः00 बजे से सायं 8ः00 बजे तक सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकाल के अनुपालन के साथ दवा, फल व सब्जी की खुदरा बिक्री (मण्डी को छोड़कर) खुली रहेगी। सोमवार से शनिवार प्रातः 8ः00 बजे से सायं 8ः00 बजे तक किराना, कृषि उपकरण/मरम्मत संबंधी, उर्वरक रसायन व बीज, जन सेवा केन्द्र, बुक शाॅप, बिजली एवं पंखे, मोबाइल व इसके रिचार्ज संबंधी, बिल्डिंग मैटेरियल, आटो पाटर््स, आटो मैकेनिक, स्ट्रीट वेंडर/पटरी व्यवसायी, कालोनी के अन्दर की दुकान, आवासीय परिसर के अंदर की दुकान, आटो मोबाइल शोरूम/वर्कशाॅप, मिठाई की दुकान (मिठाई की दुकान पर केवल बिक्री की अनुमति, दुकनों में बैठकर खाने-पीने की अनुमति नही है।) सोशल डिस्टेन्सिंग के अनुपालन के साथ खुलने की अनुमति है, लेकिन माॅल खुलने की अनुमति नही है।
सप्ताह के तीन दिन सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को प्रातः 8ः00 बजे से सायं 8ः00 बजे तक जूता/चप्पल, बरतन, सर्राफा, फर्नीचर, साइकिल, कास्मेटिक, जनरल स्टोर, कार्पेट/फोम सेन्टर, चश्मे की दुकानें, तथा सप्ताह के तीन दिन मंगलवार, गुरूवार तथा शनिवार को प्रात 8ः00 बजे से सायं 8ः00 बजे तक कपड़ा, रेडीमेड स्टोर, टेलर, ड्राई क्लीनर्स की दुकान सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकाल के अनुपालन के साथ खुलने की अनुमति है। लेकिन माॅल खुलने की अनुमति नही है। सप्ताह के सभी दिन प्रातः 4ः00 बजे से प्रातः 7ः00 बजे तक फल व सब्जी की मुख्य मण्डी, बेलइसा सोशल डिस्टेन्सिंग प्रोटोकाल के अनुपालन के साथ खुलने की अनुमति है, सामान्य जन के लिए खुदरा विक्रय की अनुमति नही होगी। इसी के साथ ही सप्ताह के सभी दिन प्रातः 6ः00 बजे से प्रातः 9ः00 बजे तक फल व सब्जी की मुख्य मण्डी का रिटेल वितरण (बेलइसा) सोशल डिस्टेन्सिंग प्रोटोकाल के अनुपालन के साथ खुलेगी, लेकिन सामान्य जन के लिए खुदरा विक्रय की अनुमति नही होगी। क्रेता व विक्रेता दोनों को फेस कवर/मास्क पहनना अनिवार्य होगा। मास्क न पहनने वाले व्यक्ति को विक्रय नहीं किया जायेगा। एक बार में 05 से अधिक व्यक्ति किसी दुकान पर एकत्र नहीं होंगे। सप्ताह के तीन दिन रविवार, बुधवार व शुक्रवार को प्रातः 8ः00 बजे से सायं 8ः00 बजे तक सैलून/ब्यूटी पार्लर की दुकान सोशल डिस्टेन्सिंग एवं प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजेशन की व्यवस्था के साथ स्टाफ द्वारा फस-शील्ड लगाना अनिवार्य होगा। अन्य लोगों हेतु फेस मास्क का प्रयोग अनिवार्य होगा। कपड़े का इस्तेमाल एक ही बार किया जायेगा अथवा डिस्पोजेबल सामग्री का उपयोग किया जायेगा। जिलाधिकारी ने आगे बताया कि बारात घर 30 व्यक्तियों के साथ विवाह सम्बंधी आयोजन हेतु खुलने की अनुमति होगी, परन्तु आयोजन की पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होगी । ऐसे आयोजनों में किसी प्रकार के शस्त्रादि की अनुमति नहीं होगी। उल्लंघन किये जाने विधि कार्यवाही अमल में लायी जायेगी। टैक्सी/मैक्सी, कैब, 3 ह्वीलर आटो/ई – रिक्शा को चलाने की अनुमति इस शर्त के साथ होगी कि निर्धारित सीट क्षमता के अनुसार ही यात्री बैठाये जायें। वाहनों में पर्याप्त मात्रा में सैनिटाइजर रखना एवं समस्त यात्रियों को फेसमास्क/फेसकवर पहनना अनिवार्य होगा। इसी प्रकार की व्यवस्था निजी कारों के संचालन में भी लागू होगी। दो पहिया वाहनों को निर्धारित सीट क्षमता के अनुसार चलने की अनुमति होगी। दोपहिया सवार समस्त व्यक्तियों को फेसकवर व हेलमेट पहनना अनिवार्य है। प्रदेश के अंदर रोडवेज की बसों के संचालन की अनुमति निर्धारित सीट क्षमता पर प्रदान की गयी है। स्टैंडिंग की अनुमति नहीं होगी। संचालन के दौरान चालक/परिचालक को फेसमास्क व ग्लब्स लगाना अनिवार्य होगा। यात्रियों को भी अनिवार्य रूप से फेसमास्क/फेसकवर पहनना होगा। स्टेज कैरिज एवं कान्ट्रैक्ट कैरिज परमिट (निर्धारित सीमा तक) धारक बसों को आवश्यक प्रतिबंधों, सुरक्षा एवं स्वच्छता के मानकों के अनुपालन करने की दशा में संचालन की अनुमति होगी। सिटी बस सेवा का संचालन भी उपरोक्त शर्तों के अधीन अनुमन्य होगा। पार्को को सुबह की सैर/व्यायाम आदि हेतु सोशल डिस्टेंसिंग, सुरक्षा व सैनिटाइजेशन के अनुपालन के साथ प्रातः 5.00 बजे से प्रातः 8.00 बजे तक तथा सायं 5.00 बजे से 8.00 तक खोलने की अनुमति होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम/मजरे के कन्टेनमेंट जोन होने पर में फसल की रोपाई/बुआई हेतु न्यूनतम आवश्यकता एवं कृषि मशीनरी यथा ट्रैक्टर आदि के उपयोग की छूट होगी। निजी/सरकारी कार्यालयों/संगठनों के प्रमुख/विभागाध्यक्ष समस्त कार्मिकों के लिए आरोग्य सेतु ऐप का 100 प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करेंगे तथा आम जनमानस में भी इस ऐप के प्रति जागरूकता फैलाकर कवरेज सुनिश्चित की जायेगी। अंतर्राज्यीय एवं राज्य के अन्दर व्यक्तियों एवं माल आदि के आवागमन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा एवं इस हेतु पृथक से किसी प्रकार की अनुमति/अनुमोदन/ ई-परमिट की आवश्यकता नहीं होगी। श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का आवागमन होगा। समस्त प्रकार के माल/माल परिवहन (खाली ट्रकों सहित) को अंतर्राज्यीय परिवहन के साथ पड़ोसी देशों की संधियों की शर्तों के अनुरूप सीमापार परिवहन की अनुमति होगी। जिलाधिकारी ने बताया कि कोविड-19 प्रबंधन से सम्बंधित स्टेट डायरेक्टिव्स का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा, जिसमें सार्वजनिक स्थानों, कार्यस्थलों व यात्रा के दौरान फेसकवर/मास्क लगाना अनिवार्य होगा। सार्वजनिक स्थलों पर सोशल डिस्टेंसिंग (2 गज की दूरी ) का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। दुकानदार सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन सुनिश्चित करायेंगे तथा एक समय में 05 से अधिक व्यक्ति इकट्ठा नहीं होने देंगे। जनसभा/भीड़ एकत्र करना प्रतिबंधित होगा। शादी सम्बंधी आयोजनों में सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित की जायेगी एंव 30 से अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने की अनुमति नहीं होगी । अन्तिम – संस्कार से सम्बंधित गतिविधियों में सोशल डिस्टेंसिंग सुनिश्चित की जायेगी एवं 20 से अधिक व्यक्तियों के इकट्ठा होने की अनुमति नही होगी । सार्वजनिक स्थानों पर थूकना जुर्माने के साथ दण्डनीय होगा। जितना हो सके घर से कार्य करने को बढ़ावा दिया जायेगा। कार्यस्थल, दुकानों व बाजारों के खुलने में शिफ्ट में कार्य किये जाने की व्यवस्था का अनुसरण किया जायेगा।  प्रवेश/निकासी एवं कॉमन प्लेस पर हैण्ड वाश/सेनिटाइजर आदि की व्यवस्था की जाएं। सम्पूर्ण कार्य-स्थल क्षेत्र में जन-प्रसाधन आदि स्थानों पर लगे दरवाजे हैण्डल आदि का निरन्तर सेनिटाइजेशन किया जाए। उन्होने बताया कि समस्त उप जिला मजिस्ट्रेटों को पूर्व से ही इंसीडेंट कमाण्डर नियुक्त किया गया है। समस्त इंसीडेंट कमाण्डर अपने स्थानीय क्षेत्राधिकार में उपर्युक्त उपायों को लागू करने के लिये उत्तरदायी होंगे और समस्त लाइन डिपार्टमेंट के अधिकारी इंसीडेंट कमाण्डर के दिशा निर्देशन में कार्य करेंगे। इंसीडेंट कमाण्डर विशेष रूप से हास्पिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के निरंतर बिना किसी आधा के संचालन/विस्तार हेतु आवश्यक संसाधनों/वर्करों/मैटीरियल के सम्बंध में आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। उपरोक्त दिशा निर्देशों का अनुपालन न किया जाना आपदा प्रबंधन अधिनियम -2005 की सुसंगत प्राविधनों के अंतर्गत दण्ड को आकृष्ट करेगा।

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बुधवार, 27 मई 2020

आइडियल जनलिस्ट एसोसिएशन आज़मगढ़ के सदर तहसील का गठन

आदरणीय #जिला #अध्यक्ष #अजय_मिश्रा व #संरक्षक #अबू_बशर_आजमी एवं #राजेंद्र_प्रसाद_राय जी के #नेतृत्व में #तेजी के साथ #वृद्धि करता हुआ #संगठन #आइडियल_जर्नलिस्ट्स_एसोसिएशन जिसमें नए #तहसील के #पदाधिकारियों का   #गठन सभी #सम्मानित #पदाधिकारियों का #अभिनंदन और स्वागत है।
    जिसमे मुझे सदस्य के रूप में चुना गया है
मै जिला अध्यक्ष जी और सभी पदाधिकारियों का दिल से धन्यवाद देता हूँ।
               बृजेश यादव

सोमवार, 25 मई 2020

राजेश कुमार होंगे आज़मगढ़ के नए जिलाधिकारी

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By:-बृजेश यादव आज़मगढ़
पहले थे आईपीएएस फिर बने आईएएस
राजस्थान के अलवर के मूल निवासी राजेश कुमार वर्ष 2008 बैच के आईएएस है। वह वर्ष 2005 में उड़ीसा बैच के आईपीएस थे बाद में फिर से मेहनत करके आईएएस बने। राजेश कुमार की प्रारंभिक शिक्षा नई दिल्ली से हुई है और दिल्ली कॉलजे ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रानिक एंड कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन किया है। मुरादाबाद में सीडीओ, बरेली में एसडीएम के साथ वर्ष 2012- 13 में संत कबीर नगर के जिलाधिकारी रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त कन्नौज व मथुरा में भी डीएम पद की जिम्मेदारी संभाली थी। पहले आईएएस राजेश कुमार लखनऊ में कौशल विकास मिशन के एमडी पद पर थे। बनारस विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद भी 2017 में संभाल चुके हैं,
वर्तमान में मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के पद पर है  अब वह जिलाधिकारी आज़मगढ़ का पद सम्भालेंगे , 31 मई को एनपी सिंह का कार्यकाल खत्म होने के बाद नए जिलाधिकारी के रुप में अपनी सेवाएं देंगे।

शनिवार, 23 मई 2020

जिले में 6 कोरोना पॉजिटिव मिले

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एक जिलाधिकारी ऐसा भी जो जनता के दिल पर राज किया, - नागेंद्र प्रसाद सिंह

जनपद आज़मगढ़ के जिलाधिकारी श्री नागेंद्र प्रसाद सिंह जी (आई ए एस ) का पेपर मैसी पोर्ट्रेट -

      किसी जनपद का कोई ऐसा प्रसाशनिक अधिकारी जो अपने सकारात्मक, रचनात्मक सोच और अपने कार्यों से उस जनपद चित्र बदल दिया हो अमूमन कम ही सुनाई पड़ती है और  जबकि ऐसे जनपद की जिसकी छवि एक बड़े स्तर पर नकारात्मक हो। वाकई यह एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। ख़ास तौर पर जब कला और साहित्य जो केंद्र बिंदु हो।
  ऐसे ही एक जिलाधिकारी हमारे गृह जनपद आज़मगढ़ के हैं श्री नागेंद्र प्रसाद सिंह। जिनके कार्यों से जनपद के लोग और यहाँ के कलाकार तथा हम स्वयं प्रभावित हो कर यहाँ चर्चा कर रहे हैं। इसी चर्चा से प्रभावित होकर हमने इनके पोर्ट्रेट पेपर मैसी में  बनाने का निश्चय किया और जो पूर्ण हुआ।
साहित्य की दुनियां में आज़मगढ़ राहुल सांस्कृत्यायन, कैफ़ी आज़मी, अयोध्या सिंह हरिऔध के नाम से दुनियाभर में विख्यात है वहीं दर्जनों की संख्या में शहीदों के भी नाम हैं जिन्होंने अपने प्राण सीमा की रक्षा में लगा दी। जहाँ देश मे एक नकारात्मक पहचान के आगे जनपद में भी इनकी खोती पहचान को कायम करने के लिए स्वयं जिलाधिकारी महोदय ने जिले के लोगों को जागरूक करने का काम किया और इनके सम्मान में अनेकों कार्य भी किया।
    आज जब कोरोना जैसी महामारी से पूरा विश्व एक संकट से लड़ रहा है। ऐसे में हमारे जिलाधिकारी महोदय दिनोरात जनपद की रक्षा और सुरक्षा में लगे हुए हैं। जिला प्रशासन आज़मगढ़ के प्रति  संवेदनशील जिलाधिकारी एन. पी.सिंह के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ, कि आज़मगढ़ के दूरदराज में संकटग्रस्त कलाकारों/रंगकर्मियों को आर्थिक व अन्य सहयोग प्रदान किया गया।
    जब कला साहित्य के महत्व को समझने वाले अधिकारी होंगे तो निश्चय ही कला व कलाकार सम्मान पाएंगे और कला पनप पाएगी।
इन्होंने लोगों का कला,संस्कृति और साहित्य के प्रति सकारात्मक नजरिया की तरफ ध्यान दिलाने की पहल की। इसका सबसे बड़ा उदाहरण इस बार हुए आज़मगढ़ महोत्सव है। यह महोत्सव पहली बार जनपद के तहसील स्तर पर किया गया और इस महोत्सव में आज़मगढ़ के सभी कला,संगीत,रंगमंच , नृत्य,खेल,आज़मगढ़ की पॉटरी, हस्तकला,और आम जन के रचनात्मक ऊर्जा को अभिव्यक्त करने के लिए एक शानदार आयोजन किया गया। तथा सम्मान दिया गया। इसका मैं स्वयं आँखों देखा उदाहरण हूँ। मुझे भी इस महोत्सव में चित्रकला,फोटोग्राफी प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था।
   मेरा मानना है कि इस प्रकार की सोच तभी आकार लेती है जब इस प्रकार सोच रखने वाला व्यक्ति स्वयं पहल करता है। जिलाधिकारी महोदय स्वयं साहित्य से जुड़े हुए हैं। तभी आज हम ऐसे व्यक्तित्व की चर्चा कर रहे हैं। जिसके कारण आज जनपद में कला साहित्य से जुड़े लोग इनकी प्रसंशा कर रहे हैं।
#azamgarh #dmazamgarh #uttarpradesh
#नागेंद्र_प्रसाद_सिंह
            लेख
भूपेंद्र कुमार अस्थाना

सोमवार, 21 जनवरी 2019

आज़मगढ़ मुबारकपुर के अब्दुल कलाम ने IAS परीक्षा में रचा इतिहास

आज़मगढ़ मुबारकपुर के अब्दुल कलाम ने IAS परीक्षा में रचा इतिहास
January 21, 2019
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उत्तर प्रदेश : हमारे देश मे मुसलमानों की हालत किसी से छिपी नहीं है। शिक्षा से लेकर नोकरियों तक मे मुसलमानों का पिछड़ापन सबके सामने हैं। आर्थिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समाज मे अभी भी बच्चों की पढ़ाई से ज़्यादा उन्हें काम काज सिखाने पर ज़्ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि पिछले कुछ समय से इस स्थिति मे बदलाव आया है।हर क्षेत्र मे मुस्लिमों का आगे आना शुरु हुआ हैं। शिक्षा क्षेत्र मे मुसलमानो मे जागरुकता बढ़ रही है।
इसी कड़ी मे उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से ऐसी खबर सामने आई है जो कि मुसलमानों के शिक्षा के प्रति बढ़ते रुझान को दर्शाती है।दरअसल आजमगढ़ के मुबारकपुर नाम के एक छोटे से कस्बे में रहने वाले अबुल कलाम ने एक बड़ा कारनामा कर दिखाया है। उन्होंने भारत की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग को पास कर ली है।उन्होंने IAS की परीक्षा में चौथा स्थान हासिल किया है।
उल्लेखनीय है कि यह एक बहुत कठिन परीक्षा होती है जिसे पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। औसत दर्जे के विधार्थी के लिए इसे पास करना असंभव जैसा ही होता है।इसमें परीक्षा मे पास होने वाले युवा देश की प्रशासनिक तंत्र का हिस्सा बनते हैं। यहीं से चयन होने के बाद युवक कलक्टर एसपी राजदूत राजनयिक वन पदाधिकारी आदि विभागीय सचिव कमिश्नर जैसे पदों पर नियुक्त किए जाते हैं। यही कारण है कि देश के हर एक नौजवान अपने सुनहरे भविष्य के लिए आईएएस की परीक्षा पास करने का सपना देखता है।

आजमगढ़ के रहने वाले अबुल कलाम बचपन से ही पढ़ने में होशियार थे।उनकी शुरूआती शिक्षा मदरसा इस्लामिया अशरफिया से हुई है और उसके बाद उन्होंने मुबारकपुर के ही इंटर कॉलेज से दसवीं और बारहवीं की परीक्षा पास की। इसके बाद वह लखनऊ चले गए और वहां से उन्होंने बीटेक किया। उनकी इस सफलता से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। वही अबुल कलाम के मोहल्ले में तो ऐसा लग रहा है जैसे ईद मनाई जा रही हो। अबुल का परिवार उनकी इस कामयाबी से काफी गर्व महसूस कर रहे हैं। और क्यों न करें उन्होंने अपने परिवार का नाम सारे देश मे रोशन जो किया है।

शनिवार, 12 जनवरी 2019

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं

😢😢हर बेटे को समर्पित जो घर से दूर है”😢😢

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
जो तकिये के बिना कहीं…भी सोने से कतराते थे…
आकर कोई देखे तो वो…कहीं भी अब सो जाते हैं…
खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा लेते हैं…
अपने रूम में किसी को…भी नहीं आने देने वाले…
अब एक बिस्तर पर सबके…साथ एडजस्ट हो जाते हैं…
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
घर को मिस करते हैं लेकिन…कहते हैं ‘बिल्कुल ठीक हूँ’…
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले…अब कहते हैं ‘कुछ नहीं चाहिए’…
पैसे कमाने की जरूरत में…वो घर से अजनबी बन जाते हैं
लड़के भी घर छोड़ जाते हैं।
बना बनाया खाने वाले अब वो खाना खुद बनाते है,
माँ-बहन-बीवी का बनाया अब वो कहाँ खा पाते है।
कभी थके-हारे भूखे भी सो जाते हैं।
लड़के भी घर छोड़ जाते है।
मोहल्ले की गलियां, जाने-पहचाने रास्ते,
जहाँ दौड़ा करते थे अपनों के वास्ते,,,
माँ बाप यार दोस्त सब पीछे छूट जाते हैं
तन्हाई में करके याद, लड़के भी आँसू बहाते है
लड़के भी घर छोड़ जाते हैं
नई नवेली दुल्हन, जान से प्यारे बहिन- भाई,
छोटे-छोटे बच्चे, चाचा-चाची, ताऊ-ताई ,
सब छुड़ा देती है साहब, ये रोटी और कमाई।
मत पूछो इनका दर्द वो कैसे छुपाते हैं,
बेटियाँ ही नही साहब, बेटे घर छोड़ जाते हैं।

बुधवार, 26 दिसंबर 2018

बहुत ही सुंदर पंकितया है

*यह कविता मै अपने उन प्रिय मित्रों को समर्पित करता हूं।* *आप सभी तक पहुंचा रहा हूँ।*
🙏🙏आपको अच्छा लगे तो #Please_Like और #Comments कर दीजिएगा।🙏🙏
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*कहाँ कहाँ खोजूँ मैं उसको*
           *किसके दरवाज़े पर जाऊँ*
*जो मेरे चावल खा जाए*
           *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

जीवन की इस कठिन डगर में
            दोस्त हज़ारों मिल जाते हैं
जो मतलब पूरा होने पर
            अपनी राह बदल जाते हैं
हरदम साथ निभाने वाला
            साथी ढूँढ कहाँ से लाऊँ

*जो मेरे चावल खा जाए*
           *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

हार सुनिश्चित मालूम थी पर
            साथ न छोड़ा दुर्योधन का
मौत सामने आई फिर भी
            पैर न पीछे हटा कर्ण का
मित्रों पर जो जान लुटाएँ
            कहाँ खोजने उनको जाऊँ

*जो मेरे चावल खा जाए*
         *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

दर्द बयाँ करने पर आए
          वे तो साथी कहलाते हैं
मन की बात समझ जाए जो
          वे ही मित्र कहे जाते हैं
जिनसे मन के तार जुड़ें वो
          किस कोने से ढूँढ के लाऊँ

*जो मेरे चावल खा जाए*
         *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

          ★आपका वही अपना★
          ★बृजेश यादव (BrY)★

रविवार, 25 नवंबर 2018

एक दरोगा ऐसा भी

एक दरोगा ऐसा भी

रायबरेली में इन दिनों एक दरोगा खूब सुर्खियों में है। दरोगा शैलेश यादव सिर्फ इसलिए सुर्खियों में है क्योंकि वह लगातार बेसहारा ,लाचार, दिव्यांगों की आर्थिक मदद अपनी तनख्वाह से करता है। यही नही बकायदा लाचार दिव्यांगों को  रोजगार भी अपने पैसे से उपलब्ध करवाता है ताकि लाचार दिव्यांग किसी के आगे हाथ न फैला सके। इस दरोगा की नेकी दिली को रायबरेली की जनता खूब सराह रही है।
पहले इस दिव्यांग को गौर से देखिए । यह दिव्यांग भदोखर थाना क्षेत्र के कुचारिया के पास का रहने वाला है और यह आधे शरीर से दिव्यांग है। इस दिव्यांग की हालत को रायबरेली के पुलिस आफिस में तैनात दरोगा शैलेश यादव ने देखा तो उसने इसे रोजगार देने को सोचा और बकायदा अपनी तनख्वाह से इसके लिए एक परचून की दुकान खुलवाई। दरोगा शैलेश यादव इसके पहले रायबरेली के ही गदागंज थाना क्षेत्र में भी एक दिव्यांग की मदद करते हुए उसे रोजगार दिलवा चुका है। दरोगा की नेकी दिली को अब लोग खूब सराह रहे है।
सवाल यह उठता है कि अगर पुलिस विभाग में इस तरह के दरोगाओं की संख्या ज्यादा हो जाये तो शायद लोगो के मन से खाकी का भय स्वतः ही खत्म हो जाये। जिस तरह लगातार शैलेश यादव गरीबो दिव्यांगों की मदद कर रहा है उसकी नेकी दिली को हम भी सलाम करते है।

शुक्रवार, 2 नवंबर 2018

*कोई मुझे पागल कहता है। कोई कृष्णा का दीवाना कहता है।।*

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कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!
मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है !
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!
समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता !
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले !
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!
भ्रमर कोई कुमुदुनी पर मचल बैठा तो हंगामा!
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा!!
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का!
मैं किस्से को हकीक़त में बदल बैठा तो हंगामा!!

गुरुवार, 25 अक्टूबर 2018

*बहुत सुंदर कविता*

*जरा इत्मीनान से पढ़ें...*

तुम लिखना चाँद की खामोशीयाँ..!
मैं पत्तों की सरसराहट लिखूंगा..!!

तुम लिखना रात की मदहोशीयाँ..!
मैं साँसों की गरमाहट लिखूंगा..!!

तुम लिखना सूबह का इंतजार..!
मैं परिंदों की चहचहाहट लिखूंगा..!!

तुम लिखना अपनी हर चाहत..!
मैं तुमको अपनी चाहत लिखूंगा..!!

कहानी लिखूंगा, किरदार लिखूंगा..!!
अगर तुम मिल जाओ, खुशिया बे हिसाब लिखूंगा..!!

कुछ किस्से लिखूंगा, कुछ हिसाब लिखूंगा..!
अभी मसरूफ हूँ थोडा, पर एक दिन तुमपे किताब लिखूंगा..!!

कुछ सवाल लिखूंगा, कुछ जवाब लिखूंगा..!
तुम्हारी आँखों की गहराई से, सुबह शाम लिखूंगा..!!

हर एक एक लम्हे को, एक एक साल लिखूंगा..!
तुमको मशहूर, खुदको को बदनाम लिखूंगा..!!

मै तो नसीब का मारा हूँ, तो क्या हुआ..!
तुमको देवता, खुद को इंसान लिखूंगा..!!

लिखे होंगे किस्से, तुमने भी बोहोत..!
पर जो मै लिखूंगा, लाजवाब लिखूंगा..!!

लिखूंगा तुम्हे बचपन वाला इतवार कभी..!
तो कभी गर्मियों की छुट्टी का इंतज़ार लिखूंगा..!!

कल का भरोसा कम रखता हूँ मै..!
तो आज सहर होने तक तेरा नाम लिखूंगा..!!

तुम चाँद से रोशन हो जानता हूँ मै..!
फिर भी तुम्हे ईद से पहले वाली शाम लिखूंगा..!!

नफरत के लिए दुनिया बोहोत है..!
मै सारे किस्से मोहोब्बत के तेरे नाम लिखूंगा..!!

मै रूह का प्यासा हूँ मुझे सुकून की तलाश है..!
मै फिर भी अपने किस्से तेरे नाम लिखूंगा..!!

मै मजहबो में विश्वास नहीं रखता..!
पर कभी रहीम तो कभी तुम्हे राम लिखूंगा..!!

कह दिया जो भी कहना था,गर फिर भी कुछ बाकी हो..!
तो खुद को इंतजार तुमको, अंजाम लिखूंगा..!!

"पिता"

•पिता की सख्ती को बर्दाशत करो, ताकी काबिल बन सको,
•पिता की बातें गौर से सुनो, ताकी दुसरो की न सुननी पड़े,
•पिता के सामने ऊंचा मत बोलो वरना भगवान तुमको नीचा कर देगा,
•पिता का सम्मान करो, ताकी तुम्हारी संतान तुम्हारा सम्मान करे,
•पिता की इज्जत करो, ताकी इससे फायदा उठा सको,
•पिता का हुक्म मानो, ताकी खुश हाल रह सको,
•पिता के सामने नजरे झुका कर रखो, ताकी भगवान तुमको दुनियां मे आगे करे,
•पिता एक किताब है जिसपर अनुभव लिखा जाता है,
•पिता के आंसु तुम्हारे सामने न गिरे, वरना भगवान तुम्हे दुनिया  से गिरा देगा,
पिता एक ऐसी हस्ती है ...!!!!
माँ का मुकाम तो बेशक़ अपनी जगह है ! पर पिता का भी कुछ कम नही, माँ के कदमों मे स्वर्ग है पर पिता स्वर्ग का दरवाजा है, अगर दरवाज़ा ना ख़ुला तो अंदर कैसे जाओगे ?
जो गरमी हो या सर्दी अपने बच्चों की रोज़ी रोटी की फ़िक्र में परेशान रहता है, ना कोई पिता के जैसा प्यार दे सकता है ना कर सकता है, अपने बच्चों से !!
याद रख़े सूरज गरम ज़रूर होता है मगर डूब जाए तो अंधेरा छा जाता है, !!
आओ आज़ सब मिलकर उस अज़ीम हस्ती के लिए कामना करते है..|
हे भगवान मेरे पिता को अच्छी सेहत ओर तंदूरस्ती देना। उनकी तमाम परेशानी को दूर कर, और उन्हें हमेंशा हमारे लिए खुश रख़ना।

इस संदेश को सभी स्कूली बच्चों तक पहुंचाया जाए 
                         आपका धन्यवाद

बुधवार, 17 अक्टूबर 2018

सौ बात की एक बात

#सौ_बात_की_एक_बात#Brijeshyadavbry
लेकिन आज कंफर्म हो गया भाई की हमारे पार्टी में बहुत से लोग सिर्फ लड़ाना जानते हैं। आपस मे भाई चारगी नही करवाना चाहते हैं, अगर उनको बोल दो पार्टी का जरा प्रचार प्रसार कर दो तो उनकी हुक़्क़ी टाइट हो जाएगी।
उनको सिर्फ बड़ी बड़ी बातें फेखना किसी चट्टी चौराहे पर #अखिलेश_यादव जी को यह करना चाहिए उनको यह करना चाहिए। वह ख़ुद भूल जाते हैं, मेरी क्या Image है कितने लोग मुझे जानते हैं, जिले में विधानसभा में अपने गांव में जो आदमी अपने घर गाँव मे कोई तलूक नही रखता है। मुझे लगता है कि वही लोग ज्यादा पार्टी और भैया अखिलेश यादव जी वह नेता जी को पूरे दिन कोसते रहते हैं और दूसरों की चाय पीने के बाद सिर्फ चमचागीरी करते हैं।
मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं। कि जो समाजवादी है और समाजवादी विचारधारा का है वह आपस में लड़ ही नहीं सकता और आप लोग फालतू की बकवास छोड़कर पार्टी को मजबूत करने का काम करिए कुछ चमचों की वजह से विधानसभा चुनाव में हार मिली इसलिए केवल पार्टी को मजबूत बनाने का कार्य करें अगर जो भी इसमें टीका टिप्पणी करता है वह समाजवादी हुई नहीं सकता पार्टी को मजबूत करने का काम करिए सबके लिए अच्छा होगा।

बुधवार, 5 सितंबर 2018

मुद्दा_राम_मंदिर_का

#मुद्दा_राम_मंदिर_का
#छोटा_मुँह_बड़ी_बाते
अगर मेरी बातें अच्छी ना लगे तो मुझे माफ़👏 करना आप लोग अपना दोस्त और अपना छोटा भाई समझ कर।
पर ध्यान से एक बार जरूर से मेरी कही हुए बातो पर गौर करना।
आप लोग किसी भी से पार्टी  हट कर सोचना।
एक भगवान के प्रति  एक मनुष्य के जैसा सोचना।।
अगर सच कहूं तो प्रभु श्री राम जी का मंदिर आज का आज बन सकता है, और उसे कोई रोक भी नही सकता है  क्योकि यह एक भगवान और भक्तों का सवाल है, पर जब खुद जो प्रभु का नाम लेकर अपने पेट पाल रही है ये bjp के लोग भगवान के नाम लेकर अपनी राजनीतिक चमका रहे हैं। यह खुद ही नही चाहते हैं कि मन्दिर बने। क्योकि आपकी और उनको मुझको सबको पता है ये राजनीति है अगर जिस दिन राम मंदिर बन गया उस दिन से बीजेपी की गन्दी राजनीति का खात्मा हो जाएगा।
क्योकि bjp की नींव ही दो मुद्दे पर चलती है।
एक राममंदिर और दूसरा हिन्दू बस जिस दिन ये bjp के लोग अलापना छोड़ दें। मै समझता हूं कि उस दिन से ये भारत के राजनीतिक जीवन स खत्म हो जाएंगे।
क्योकि राममूर्ति और राममंदिर तो एक बहाना है इनको तो सिर्फ अपना उल्लू सीधा करना है।
सच मे अगर इन लोगों को मंदिर बनवाना होता। तो ये लोग पहले खुद प्रभु श्री राम के मंदिर बनवाते उसके बाद अपना पार्टी कार्यालय।
पर  वह लोग यह भूल गए हैं कि भगवान के घर देर है अंधेर नही है।
जिस दिन उनका कोप हुआ ना तो ये पार्टी बचेगी ना ही पार्टी का अस्तित्व रहेगा।

शुक्रवार, 31 अगस्त 2018

भक्ति का प्रथम मार्ग

प्रेरक कहानी: भक्ति का प्रथम मार्ग है, सरलता!

एक आलसी लेकिन भोलाभाला युवक था आनंद। दिन भर कोई काम नहीं करता बस खाता ही रहता और सोता रहता। घर वालों ने कहा चलो जाओ निकलो घर से, कोई काम धाम करते नहीं हो बस पड़े रहते हो।

वह घर से निकल कर यूं ही भटकते हुए एक आश्रम पहुंचा। वहां उसने देखा कि एक गुरुजी हैं उनके शिष्य कोई काम नहीं करते बस मंदिर की पूजा करते हैं। उसने मन में सोचा यह बढिया है कोई काम धाम नहीं बस पूजा ही तो करना है। गुरुजी के पास जाकर पूछा, क्या मैं यहां रह सकता हूं।
गुरुजी बोले हां, हां क्यों नहीं?
लेकिन मैं कोई काम नहीं कर सकता हूं गुरुजी।
कोई काम नहीं करना है बस पूजा करनी होगी।
आनंद : ठीक है वह तो मैं कर लूंगा ...

अब आनंद महाराज आश्रम में रहने लगे। ना कोई काम ना कोई धाम बस सारा दिन खाते रहो और प्रभु मक्ति में भजन गाते रहो।

महीना भर हो गया फिर एक दिन आई एकादशी। उसने रसोई में जाकर देखा खाने की कोई तैयारी नहीं थी।

उसने गुरुजी से पूछा: आज खाना नहीं बनेगा क्या।

गुरुजी ने कहा: नहीं आज तो एकादशी है। तुम्हारा भी उपवास है ।

उसने कहा: नहीं अगर हमने उपवास कर लिया तो कल का दिन ही नहीं देख पाएंगे हम तो... हम नहीं कर सकते उपवास... हमें तो भूख लगती है। आपने पहले क्यों नहीं बताया?

गुरुजी ने कहा: ठीक है तुम ना करो उपवास, पर खाना भी तुम्हारे लिए कोई और नहीं बनाएगा तुम खुद बना लो।

मरता क्या न करता गया रसोई में, गुरुजी फिर आए: देखो अगर तुम खाना बना लो तो राम जी को भोग जरूर लगा लेना और नदी के उस पार जाकर बना लो रसोई।

ठीक है, लकड़ी, आटा, तेल, घी, सब्जी लेकर आंनद महाराज चले गए, जैसा तैसा खाना भी बनाया, खाने लगा तो याद आया गुरुजी ने कहा था कि राम जी को भोग लगाना है। वह भजन गाने लगा... आओ मेरे राम जी, भोग लगाओ जी प्रभु राम आइए, श्रीराम आइए मेरे भोजन का भोग लगाइए...

कोई ना आया, तो बैचैन हो गया कि यहां तो भूख लग रही है और राम जी आ ही नहीं रहे। भोला मानस जानता नहीं था कि प्रभु साक्षात तो आएंगे नहीं । पर गुरुजी की बात मानना जरूरी है।

फिर उसने कहा , देखो प्रभु राम जी, मैं समझ गया कि आप क्यों नहीं आ रहे हैं। मैंने रूखा सूखा बनाया है और आपको तर माल खाने की आदत है इसलिए नहीं आ रहे हैं। तो सुनो प्रभु... आज वहां भी कुछ नहीं बना है, सबकी एकादशी है, खाना हो तो यह भोग ही खालो।

श्रीराम अपने भक्त की सरलता पर बड़े मुस्कुराए और माता सीता के साथ प्रकट हो गए। भक्त असमंजस में। गुरुजी ने तो कहा था कि राम जी आएंगे पर यहां तो माता सीता भी आईं है और मैंने तो भोजन बस दो लोगों का बनाया हैं। चलो कोई बात नहीं आज इन्हें ही खिला देते हैं।

बोला: प्रभु! मैं भूखा रह गया लेकिन मुझे आप दोनों को देखकर बड़ा अच्छा लग रहा है। लेकिन अगली एकादशी पर ऐसा न करना पहले बता देना कि कितने जन आ रहे हो। और हां थोड़ा जल्दी आ जाना।

राम जी उसकी बात पर बड़े मुदित हुए। प्रसाद ग्रहण कर के चले गए।

अगली एकादशी तक यह भोला मानस सब भूल गया। उसे लगा प्रभु ऐसे ही आते होंगे और प्रसाद ग्रहण करते होंगे। फिर एकादशी आई। गुरुजी से कहा, मैं चला अपना खाना बनाने पर गुरुजी थोड़ा ज्यादा अनाज लगेगा, वहां दो लोग आते हैं।

गुरुजी मुस्कुराए, भूख के मारे बावला है। ठीक है ले जा और अनाज लेजा। अबकी बार उसने तीन लोगों का खाना बनाया। फिर गुहार लगाई प्रभु राम आइए, सीताराम आइए, मेरे भोजन का भोग लगाइए...

प्रभु की महिमा भी निराली है। भक्त के साथ कौतुक करने में उन्हें भी बड़ा मजा आता है। इस बार वे अपने भाई लक्ष्मण, भरत शत्रुघ्न और हनुमान जी को लेकर आ गए। भक्त को चक्कर आ गए।

यह क्या हुआ। एक का भोजन बनाया तो दो आए आज दो का खाना ज्यादा बनाया तो पूरा खानदान आ गया। लगता है आज भी भूखा ही रहना पड़ेगा। सबको भोजन लगाया और बैठे-बैठे देखता रहा। अनजाने ही उसकी भी एकादशी हो गई।

फिर अगली एकादशी आने से पहले गुरुजी से कहा, गुरुजी, ये आपके प्रभु राम जी, अकेले क्यों नहीं आते हर बार कितने सारे लोग ले आते हैं? इस बार अनाज ज्यादा देना। गुरुजी को लगा, कहीं यह अनाज बेचता तो नहीं है देखना पड़ेगा जाकर। भंडार में कहा इसे जितना अनाज चाहिए दे दो और छुपकर उसे देखने चल पड़े।

इस बार आनंद ने सोचा, खाना पहले नहीं बनाऊंगा, पता नहीं कितने लोग आ जाएं। पहले बुला लेता हूं फिर बनाता हूं। फिर टेर लगाई प्रभु राम आइए , श्री राम आइए, मेरे भोजन का भोग लगाइए। सारा राम दरबार मौजूद। इस बार तो हनुमान जी भी साथ आए लेकिन यह क्या प्रसाद तो तैयार ही नहीं है।

भक्त ठहरा भोला भाला, बोला प्रभु इस बार मैंने खाना नहीं बनाया, प्रभु ने पूछा क्यों?
बोला: मुझे मिलेगा तो है नहीं फिर क्या फायदा बनाने का, आप ही बना लो और खुद ही खा लो।

राम जी मुस्कुराए, सीता माता भी गदगद हो गई उसके मासूम जवाब से। लक्ष्मण जी बोले क्या करें प्रभु। प्रभु बोले भक्त की इच्छा है पूरी तो करनी पड़ेगी। चलो लग जाओ काम से। लक्ष्मण जी ने लकड़ी उठाई, माता सीता आटा सानने लगीं। भक्त एक तरफ बैठकर देखता रहा। माता सीता रसोई बना रही थी तो कई ऋषि-मुनि, यक्ष, गंधर्व प्रसाद लेने आने लगे।

इधर गुरुजी ने देखा खाना तो बना नहीं भक्त एक कोने में बैठा है।
पूछा बेटा क्या बात है खाना क्यों नहीं बनाया?

बोला, अच्छा किया गुरुजी आप आ गए देखिए कितने लोग आते हैं प्रभु के साथ।

गुरुजी बोले: मुझे तो कुछ नहीं दिख रहा तुम्हारे और अनाज के सिवा।

भक्त ने माथा पकड़ लिया, एक तो इतनी मेहनत करवाते हैं प्रभु, भूखा भी रखते हैं और ऊपर से गुरुजी को दिख भी नहीं रहे यह और बड़ी मुसीबत है।

प्रभु से कहा: आप गुरुजी को क्यों नहीं दिख रहे हैं?

प्रभु बोले: मैं उन्हें नहीं दिख सकता।

बोला: क्यों वे तो बड़े पंडित हैं, ज्ञानी हैं विद्वान हैं उन्हें तो बहुत कुछ आता है उनको क्यों नहीं दिखते आप?

प्रभु बोले: माना कि उनको सब आता है पर वे सरल नहीं हैं तुम्हारी तरह। इसलिए उनको नहीं दिख सकता।

आनंद ने गुरुजी से कहा: गुरुजी प्रभु कह रहे हैं आप सरल नहीं है इसलिए आपको नहीं दिखेंगे।

गुरुजी रोने लगे वाकई मैंने सबकुछ पाया पर सरलता नहीं पा सका तुम्हारी तरह, और प्रभु तो मन की सरलता से ही मिलते हैं। प्रभु प्रकट हो गए और गुरुजी को भी दर्शन दिए। इस तरह एक भक्त के कहने पर प्रभु ने रसोई भी बनाई।