बुधवार, 27 मई 2020

आइडियल जनलिस्ट एसोसिएशन आज़मगढ़ के सदर तहसील का गठन

आदरणीय #जिला #अध्यक्ष #अजय_मिश्रा व #संरक्षक #अबू_बशर_आजमी एवं #राजेंद्र_प्रसाद_राय जी के #नेतृत्व में #तेजी के साथ #वृद्धि करता हुआ #संगठन #आइडियल_जर्नलिस्ट्स_एसोसिएशन जिसमें नए #तहसील के #पदाधिकारियों का   #गठन सभी #सम्मानित #पदाधिकारियों का #अभिनंदन और स्वागत है।
    जिसमे मुझे सदस्य के रूप में चुना गया है
मै जिला अध्यक्ष जी और सभी पदाधिकारियों का दिल से धन्यवाद देता हूँ।
               बृजेश यादव

सोमवार, 25 मई 2020

राजेश कुमार होंगे आज़मगढ़ के नए जिलाधिकारी

*Ymsnews24*
By:-बृजेश यादव आज़मगढ़
पहले थे आईपीएएस फिर बने आईएएस
राजस्थान के अलवर के मूल निवासी राजेश कुमार वर्ष 2008 बैच के आईएएस है। वह वर्ष 2005 में उड़ीसा बैच के आईपीएस थे बाद में फिर से मेहनत करके आईएएस बने। राजेश कुमार की प्रारंभिक शिक्षा नई दिल्ली से हुई है और दिल्ली कॉलजे ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रानिक एंड कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन किया है। मुरादाबाद में सीडीओ, बरेली में एसडीएम के साथ वर्ष 2012- 13 में संत कबीर नगर के जिलाधिकारी रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त कन्नौज व मथुरा में भी डीएम पद की जिम्मेदारी संभाली थी। पहले आईएएस राजेश कुमार लखनऊ में कौशल विकास मिशन के एमडी पद पर थे। बनारस विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद भी 2017 में संभाल चुके हैं,
वर्तमान में मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के पद पर है  अब वह जिलाधिकारी आज़मगढ़ का पद सम्भालेंगे , 31 मई को एनपी सिंह का कार्यकाल खत्म होने के बाद नए जिलाधिकारी के रुप में अपनी सेवाएं देंगे।

शनिवार, 23 मई 2020

जिले में 6 कोरोना पॉजिटिव मिले

*YmsNews24* 
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एक जिलाधिकारी ऐसा भी जो जनता के दिल पर राज किया, - नागेंद्र प्रसाद सिंह

जनपद आज़मगढ़ के जिलाधिकारी श्री नागेंद्र प्रसाद सिंह जी (आई ए एस ) का पेपर मैसी पोर्ट्रेट -

      किसी जनपद का कोई ऐसा प्रसाशनिक अधिकारी जो अपने सकारात्मक, रचनात्मक सोच और अपने कार्यों से उस जनपद चित्र बदल दिया हो अमूमन कम ही सुनाई पड़ती है और  जबकि ऐसे जनपद की जिसकी छवि एक बड़े स्तर पर नकारात्मक हो। वाकई यह एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। ख़ास तौर पर जब कला और साहित्य जो केंद्र बिंदु हो।
  ऐसे ही एक जिलाधिकारी हमारे गृह जनपद आज़मगढ़ के हैं श्री नागेंद्र प्रसाद सिंह। जिनके कार्यों से जनपद के लोग और यहाँ के कलाकार तथा हम स्वयं प्रभावित हो कर यहाँ चर्चा कर रहे हैं। इसी चर्चा से प्रभावित होकर हमने इनके पोर्ट्रेट पेपर मैसी में  बनाने का निश्चय किया और जो पूर्ण हुआ।
साहित्य की दुनियां में आज़मगढ़ राहुल सांस्कृत्यायन, कैफ़ी आज़मी, अयोध्या सिंह हरिऔध के नाम से दुनियाभर में विख्यात है वहीं दर्जनों की संख्या में शहीदों के भी नाम हैं जिन्होंने अपने प्राण सीमा की रक्षा में लगा दी। जहाँ देश मे एक नकारात्मक पहचान के आगे जनपद में भी इनकी खोती पहचान को कायम करने के लिए स्वयं जिलाधिकारी महोदय ने जिले के लोगों को जागरूक करने का काम किया और इनके सम्मान में अनेकों कार्य भी किया।
    आज जब कोरोना जैसी महामारी से पूरा विश्व एक संकट से लड़ रहा है। ऐसे में हमारे जिलाधिकारी महोदय दिनोरात जनपद की रक्षा और सुरक्षा में लगे हुए हैं। जिला प्रशासन आज़मगढ़ के प्रति  संवेदनशील जिलाधिकारी एन. पी.सिंह के प्रति आभार व्यक्त करता हूँ, कि आज़मगढ़ के दूरदराज में संकटग्रस्त कलाकारों/रंगकर्मियों को आर्थिक व अन्य सहयोग प्रदान किया गया।
    जब कला साहित्य के महत्व को समझने वाले अधिकारी होंगे तो निश्चय ही कला व कलाकार सम्मान पाएंगे और कला पनप पाएगी।
इन्होंने लोगों का कला,संस्कृति और साहित्य के प्रति सकारात्मक नजरिया की तरफ ध्यान दिलाने की पहल की। इसका सबसे बड़ा उदाहरण इस बार हुए आज़मगढ़ महोत्सव है। यह महोत्सव पहली बार जनपद के तहसील स्तर पर किया गया और इस महोत्सव में आज़मगढ़ के सभी कला,संगीत,रंगमंच , नृत्य,खेल,आज़मगढ़ की पॉटरी, हस्तकला,और आम जन के रचनात्मक ऊर्जा को अभिव्यक्त करने के लिए एक शानदार आयोजन किया गया। तथा सम्मान दिया गया। इसका मैं स्वयं आँखों देखा उदाहरण हूँ। मुझे भी इस महोत्सव में चित्रकला,फोटोग्राफी प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था।
   मेरा मानना है कि इस प्रकार की सोच तभी आकार लेती है जब इस प्रकार सोच रखने वाला व्यक्ति स्वयं पहल करता है। जिलाधिकारी महोदय स्वयं साहित्य से जुड़े हुए हैं। तभी आज हम ऐसे व्यक्तित्व की चर्चा कर रहे हैं। जिसके कारण आज जनपद में कला साहित्य से जुड़े लोग इनकी प्रसंशा कर रहे हैं।
#azamgarh #dmazamgarh #uttarpradesh
#नागेंद्र_प्रसाद_सिंह
            लेख
भूपेंद्र कुमार अस्थाना

सोमवार, 21 जनवरी 2019

आज़मगढ़ मुबारकपुर के अब्दुल कलाम ने IAS परीक्षा में रचा इतिहास

आज़मगढ़ मुबारकपुर के अब्दुल कलाम ने IAS परीक्षा में रचा इतिहास
January 21, 2019
https://Brijeshyadavbry.blogspot.com/
उत्तर प्रदेश : हमारे देश मे मुसलमानों की हालत किसी से छिपी नहीं है। शिक्षा से लेकर नोकरियों तक मे मुसलमानों का पिछड़ापन सबके सामने हैं। आर्थिक रूप से पिछड़े मुस्लिम समाज मे अभी भी बच्चों की पढ़ाई से ज़्यादा उन्हें काम काज सिखाने पर ज़्ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि पिछले कुछ समय से इस स्थिति मे बदलाव आया है।हर क्षेत्र मे मुस्लिमों का आगे आना शुरु हुआ हैं। शिक्षा क्षेत्र मे मुसलमानो मे जागरुकता बढ़ रही है।
इसी कड़ी मे उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से ऐसी खबर सामने आई है जो कि मुसलमानों के शिक्षा के प्रति बढ़ते रुझान को दर्शाती है।दरअसल आजमगढ़ के मुबारकपुर नाम के एक छोटे से कस्बे में रहने वाले अबुल कलाम ने एक बड़ा कारनामा कर दिखाया है। उन्होंने भारत की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग को पास कर ली है।उन्होंने IAS की परीक्षा में चौथा स्थान हासिल किया है।
उल्लेखनीय है कि यह एक बहुत कठिन परीक्षा होती है जिसे पास करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। औसत दर्जे के विधार्थी के लिए इसे पास करना असंभव जैसा ही होता है।इसमें परीक्षा मे पास होने वाले युवा देश की प्रशासनिक तंत्र का हिस्सा बनते हैं। यहीं से चयन होने के बाद युवक कलक्टर एसपी राजदूत राजनयिक वन पदाधिकारी आदि विभागीय सचिव कमिश्नर जैसे पदों पर नियुक्त किए जाते हैं। यही कारण है कि देश के हर एक नौजवान अपने सुनहरे भविष्य के लिए आईएएस की परीक्षा पास करने का सपना देखता है।

आजमगढ़ के रहने वाले अबुल कलाम बचपन से ही पढ़ने में होशियार थे।उनकी शुरूआती शिक्षा मदरसा इस्लामिया अशरफिया से हुई है और उसके बाद उन्होंने मुबारकपुर के ही इंटर कॉलेज से दसवीं और बारहवीं की परीक्षा पास की। इसके बाद वह लखनऊ चले गए और वहां से उन्होंने बीटेक किया। उनकी इस सफलता से पूरे गांव में खुशी का माहौल है। वही अबुल कलाम के मोहल्ले में तो ऐसा लग रहा है जैसे ईद मनाई जा रही हो। अबुल का परिवार उनकी इस कामयाबी से काफी गर्व महसूस कर रहे हैं। और क्यों न करें उन्होंने अपने परिवार का नाम सारे देश मे रोशन जो किया है।

शनिवार, 12 जनवरी 2019

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं

😢😢हर बेटे को समर्पित जो घर से दूर है”😢😢

बेटे भी घर छोड़ जाते हैं
जो तकिये के बिना कहीं…भी सोने से कतराते थे…
आकर कोई देखे तो वो…कहीं भी अब सो जाते हैं…
खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा लेते हैं…
अपने रूम में किसी को…भी नहीं आने देने वाले…
अब एक बिस्तर पर सबके…साथ एडजस्ट हो जाते हैं…
बेटे भी घर छोड़ जाते हैं.!!
घर को मिस करते हैं लेकिन…कहते हैं ‘बिल्कुल ठीक हूँ’…
सौ-सौ ख्वाहिश रखने वाले…अब कहते हैं ‘कुछ नहीं चाहिए’…
पैसे कमाने की जरूरत में…वो घर से अजनबी बन जाते हैं
लड़के भी घर छोड़ जाते हैं।
बना बनाया खाने वाले अब वो खाना खुद बनाते है,
माँ-बहन-बीवी का बनाया अब वो कहाँ खा पाते है।
कभी थके-हारे भूखे भी सो जाते हैं।
लड़के भी घर छोड़ जाते है।
मोहल्ले की गलियां, जाने-पहचाने रास्ते,
जहाँ दौड़ा करते थे अपनों के वास्ते,,,
माँ बाप यार दोस्त सब पीछे छूट जाते हैं
तन्हाई में करके याद, लड़के भी आँसू बहाते है
लड़के भी घर छोड़ जाते हैं
नई नवेली दुल्हन, जान से प्यारे बहिन- भाई,
छोटे-छोटे बच्चे, चाचा-चाची, ताऊ-ताई ,
सब छुड़ा देती है साहब, ये रोटी और कमाई।
मत पूछो इनका दर्द वो कैसे छुपाते हैं,
बेटियाँ ही नही साहब, बेटे घर छोड़ जाते हैं।

बुधवार, 26 दिसंबर 2018

बहुत ही सुंदर पंकितया है

*यह कविता मै अपने उन प्रिय मित्रों को समर्पित करता हूं।* *आप सभी तक पहुंचा रहा हूँ।*
🙏🙏आपको अच्छा लगे तो #Please_Like और #Comments कर दीजिएगा।🙏🙏
👉🌐👉https://Brijeshyadavbry.blogspot.com
*कहाँ कहाँ खोजूँ मैं उसको*
           *किसके दरवाज़े पर जाऊँ*
*जो मेरे चावल खा जाए*
           *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

जीवन की इस कठिन डगर में
            दोस्त हज़ारों मिल जाते हैं
जो मतलब पूरा होने पर
            अपनी राह बदल जाते हैं
हरदम साथ निभाने वाला
            साथी ढूँढ कहाँ से लाऊँ

*जो मेरे चावल खा जाए*
           *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

हार सुनिश्चित मालूम थी पर
            साथ न छोड़ा दुर्योधन का
मौत सामने आई फिर भी
            पैर न पीछे हटा कर्ण का
मित्रों पर जो जान लुटाएँ
            कहाँ खोजने उनको जाऊँ

*जो मेरे चावल खा जाए*
         *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

दर्द बयाँ करने पर आए
          वे तो साथी कहलाते हैं
मन की बात समझ जाए जो
          वे ही मित्र कहे जाते हैं
जिनसे मन के तार जुड़ें वो
          किस कोने से ढूँढ के लाऊँ

*जो मेरे चावल खा जाए*
         *ऐसा मित्र कहाँ से लाऊँ।*

          ★आपका वही अपना★
          ★बृजेश यादव (BrY)★